अपने साथ हुए अत्याचार को बनाया हथियार

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अपने साथ हुए अत्याचार को बनाया हथियार
Jan 01, 05:30 am
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जज्बे को सलाम

-भ्रूण परीक्षण व भ्रूण हत्या के ससुराल वालों के दबाव के खिलाफ लड़ी लंबी लड़ाई

-अब अपने जैसे हालात की शिकार महिलाओं की मदद के लिए चला रही हैं मुहिम

अविनाश चंद्र, नई दिल्ली

‘अकेले ही चले थे जानिबे मंजिल, लोग आते गए कारवां बनता गया।’ ये पंक्तियां दो वर्ष पूर्व भ्रूण परीक्षण व कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ बिगुल फूंकने वाली डॉक्टर मीतू खुराना पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। अपने साथ हुए अत्याचार को हथियार बनाकर अकेले ही कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ मुहिम शुरू करने वाली दिल्ली की इस महिला डॉक्टर के साथ आज देश विदेश की हजारों महिलाएं जुड़ी हैं। और इसके खिलाफ लोगों में अलख जगा रही हैं। हालांकि सबकुछ इतना आसान नहीं था। शुरू में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन डॉ. मीतू खुराना ने हार नहीं मानी।

यह आपबीती है जनकपुरी ए ब्लॉक में रहने वाली डॉ. मीतू खुराना की। डॉ. एसी खुराना की दो बेटियों में से एक मीतू ने वर्ष 2000 में पुणे से एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर राजधानी के रेलवे अस्पताल में नौकरी शुरू की। वर्ष 2004 में घरवालों ने उनकी शादी राजधानी के ही एक चिकित्सक डॉ. कमल खुराना से कर दी। वर्ष 2005 में जब वह गर्भवती हुई तो ससुरालवालों ने भ्रूण परीक्षण के लिए दबाव डालना शुरू किया। विरोध करने पर बहाने से भ्रूण की जांच करा ली गई और गर्भ में जुड़वां बच्चियों की बात पता लगते ही गर्भपात के लिए दबाव डालने लगे। मना करने पर उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा। अंत में उन्हें घर से निकाल दिया गया। इतना होने के बावजूद मीतू ने हार नहीं मानी और पति व ससुराल के लोगों सहित अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मुहिम छेड़ दी।

तमाम धमकियों व दबावों को झेलते हुए मीतू अकेले ही अपनी दो बेटियों के साथ अदालत, पुलिस व महिला आयोग के चक्कर काटती रहीं। अंतत: उच्च न्यायालय ने उनके पति को प्रतिमाह 8 हजार गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। यह मामला अभी अदालत में चल रहा है। मीतू की जुड़वां बेटियां आज पांच वर्ष की हो चुकी हैं। मीतू ने बाद में अपने जैसे हालात की शिकार महिलाओं की सहायता शुरू की। आज देश विदेश की 12 हजार से अधिक महिलाएं उनकी मुहिम में शामिल हैं। पिछले दो वर्ष से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन वाशिंगटन सिटी, सैन फ्रांसिस्को, मेलबर्न, सिंगापुर व दुबई व दिल्ली सहित कोलकाता, चेन्नई, मुंबई व अन्य शहरों में महिलाएं कन्या भ्रूण हत्या व लिंग परीक्षण के खिलाफ तमाम जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं।

डॉ. मीतू खुराना जो कुछ भी कर पाईं इसका सारा श्रेय अपने पिता डॉ. एसी खुराना व परिवार के अन्य सदस्यों को देती हैं। प्रताड़ना के दिनों को याद करते हुए मीतू कहती हैं कि पढ़ी लिखी व सक्षम होने के बावजूद उनकी बच्चियों को बोझ समझा गया और उनकी हत्या करने की साजिश की गई। शासन प्रशासन के रवैये से वह काफी आहत हैं। फिर भी उन्होंने चुप रहने के बजाय लड़ने का और दूसरों को जागरूक करने का फैसला लिया।
(http://in.jagran.yahoo.com/news/local/delhi/4_3_7318424.html)

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Author: savedaughters19

This is a coverage of my struggles to save my daughters.I am thank full to my parents not only for Not killing me ,but also helping me save my daughters... My dream- A big shelter house for women who want to give birth to their daughters and raise them up with dignity and self respect , but have to fight their own families to do so. Will have medical facilities and facilities for legal aid. will have training centers for vocational courses so that they can stand up on their own two feet and stop the dependency on their husbands for finances, A child care center run and managed by the inmates, A kitchen and a vegetable farm run and managed by the inmates. At present only a dream.... But with grace of God will become a reality. God will show the way and means to achieve the dream.

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