मां की ममता पिता की दौलत पर भारी

 मां की ममता पिता की दौलत पर भारी

28 Jul 2010, 0346 hrs IST,

नवभारत टाइम्स

राजेश चौधरी नई दिल्ली।

। एक नवजात बच्चे की कस्टडी का मामला कोर्ट पहुंच गया लेकिन कानूनी लड़ाई में मां भारी पड़ी क्योंकि मां की ममता पिता के पैसे से बड़ी है। अदालत ने कहा कि मां की केयर और उसके प्यार की जगह कोई अमाउंट नहीं ले सकता।

तीस हजारी की एक सिविल कोर्ट ने निर्देश दिया कि बच्चे को मां के हवाले किया जाए। बच्चे की उम्र 20 महीने की है और जब वह 9 महीने का था तब मां को बच्चे से अलग कर दिया गया था। अदालत ने बिंदापुर के एसएचओ को निर्देश दिया है कि वह बच्चे को पिता के साथ 29 जुलाई को अदालत में पेश करें।

मामला बिंदापुर थाना क्षेत्र का है। सुनीता (बदला हुआ नाम) ने अदालत में अर्जी दाखिल कर कहा था कि उसके बेटे को उसके पति राकेश (बदला हुआ नाम) ने अपने पास जबरन रखा हुआ है जबकि उसका बेटा सिर्फ 9 महीने का है और उसे मां के दूध की जरूरत है।

याचिका में कहा गया कि 31 अक्टूबर, 2006 को सुनीता और राकेश की शादी हुई थी। शादी के बाद 9 अक्टूबर, 2008 को उसे बेटा हुआ। इसी बीच उसके ससुरालियों ने उसे प्रताडि़त किया और जून, 2009 में उसे घर से निकाल दिया गया। बेटे को उसके पति ने अपने पास रख लिया और उसे मिलने नहीं दिया जाता। उसका बेटा अभी काफी छोटा है और उसे मां के दूध और केयर की जरूरत है। वह सिलाई का काम करती है और अपने बच्चे की देखभाल अच्छी तरीके से कर सकती है। दूसरी तरफ महिला के पति राकेश ने दलील दी कि महिला ने खुद घर छोड़ा है। सुनीता का स्वभाव अच्छा नहीं है वह बार-बार यह कहती थी कि राकेश अपने घर वालों से अलग रहे। बाद में उसे उसी घर में फर्स्ट फ्लोर रहने को दे दिया गया। इतना ही नहीं वह खुद अपने बेटे को दूध नहीं पिलाती थी।

 साथ ही राकेश और राकेश की मां बच्चे को पालने में सक्षम हैं राकेश की माली हालात भी काफी अच्छी है। राकेश ने अदालत में आरोप लगाया कि महिला खुद बच्चे को छोड़कर 18 दिसंबर, 2008 को चली गई थी। दोनों पक्षों की दलील के बाद अदालत ने कहा कि यह भरोसा करना मुश्किल है कि सुनीता अपने बच्चे को पैदा होने के 45 दिनों के अंदर ही छोड़कर चली गई।

महिला ने अपने बेटे के लिए अदालत तक का दरवाजा खटखटाया है और अपने बच्चे की कस्टडी के लिए उसे जितना करना था वह कर रही है। ऐसे में राकेश की दलील को मंजूर नहीं किया जा सकता। बच्चे को 5 साल की उम्र तक उसकी मां के पास ही रखना समझदारी है। यह सही है कि पिता की आर्थिक हैसियत अच्छी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चा वहीं ज्यादा खुश रहेगा। मां की केयर और प्यार से बढ़कर कोई धन नहीं है। अगर मां बच्चे की बुनियादी जरूरतों को पूरा करती है तो वह दायित्व निभाने के काबिल होगी। बच्चे की उम्र अभी काफी कम है और उसे मां की सख्त जरूरत है ऐसे में बच्चे की अंतरिम कस्टडी मां के हवाले की जाए। बच्चा मां के हवाले किए जाने के बाद उसका पिता महीने में 3 शनिवार को अपने बच्चे से मिल सकता है।

http://navbharattimes.indiatimes.com/delhiarticleshow/6224275.cms

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